UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit chapter 3 अभिलाषा

 UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit chapter 3 अभिलाषा

UP Board Solutions for Class 7 Sanskrit chapter 3 अभिलाषा

 

शब्दार्थाः- दयादृष्टिः = कृपापूर्ण भाव, देया = देना चाहिए, जातु = कदाचित् (कभी), नो = नहीं, हेया = छोड़े, जाताः = हो गए हैं, इदानीं = इस समय, मूढ़ता = अज्ञानता, द्रुतम् = शीघ्र, नेया = ले जानी चाहिए, त्वदुपदेशामृतम् = तुम्हारे उपदेशरूपी अमृत को,  त्यक्त्वा = छोड़कर, विपन्नः = दुखी, हन्त = खेद है, बूमहे = कहें, गेया = गाई जानी चाहिए, स्वीयाः = अपने, विनीतप्रार्थनैकेयम् = विनम्र प्रार्थना एक यह।

दयामय ………………………………………………………………………….. नो हेया ॥1॥

हिन्दी अनुवाद – हे दयामय! देव! दीन-दुखियों पर सदा दयादृष्टि (कृपा) रखें। निर्बलों, असहायों की रक्षा का वचन कभी न तोड़े।

मनुष्या ………………………………………………………………………….. त्वचा नेया ॥2॥

हिन्दी अनुवाद – मानव आजकल दानव बन चुका है, इसलिए देश को अज्ञानता से बचाना चाहिए।

त्वदुपदेशामृतं ………………………………………………………………………….. पुनर्गेया ॥3॥

हिन्दी अनुवाद – खेद है कि तुम्हारा उपदेशरूपी अमृत त्यागकर लोग इस संसार में दुखी बने । हुए हैं। इनके उद्धार के लिए एकबार फिर गीता गाई जानी चाहिए।

किमधिकं ………………………………………………………………………….. विस्मृतिं नेया ॥4॥

हिन्दी अनुवाद – हे भगवान! आपसे और क्या विनय करें; बसे इतनी प्रार्थना  है कि हम सब आप ही के बच्चे हैं; हमें भूलिएगा नहीं।

अभ्यास

प्रश्न 1. उच्चारणं कुरु पुस्तिकायां च लिखतनोट-विद्यार्थी स्वयं करें।

प्रश्न 2. एकपदेन उत्तरत
(क) दीनेषु का देया?
उत्तर :
दया दृष्टिः
(ख) कस्याः प्रतिज्ञा न हेया?
उत्तर :
दीनरक्षाया।
(ग) मूढता कस्मात्  दूरे नेया?
उत्तर :
देशात्
(घ) मानवानाम् उद्धाराय पुनः का गेया?
उत्तर :
गीता।

प्रश्न 3.
पाठात् उचित पदानि चित्वा वाक्यं पूरयत (पूरा करके)
(क) दीन रक्षायाः दयालो! जातु नो हेया।
(ख) मूढता देशात् द्रुतं दूरे त्वया नेया।।
(ग) उद्धाराय चैतेषां प्रभो! गीता पुनः गेया।
(घ) यदेते बालकाः स्वीयाः प्रभो नो विस्मृति नेयाः।

प्रश्न 4.
रेखांकित पदानि आधृत्य प्रश्न निर्माणं कुरुत (करके)
(क) दीनेषु दयादृष्टिः सदा देया।
उत्तर :
दीनेषु का संदा देया?

(ख)
 मूढता देशात् दूरे त्वया नेया।
उत्तर :
का देशात् दूरे त्वया नेया?

(ग)
 गीता पुनर्गया।
उत्तर :
का पुनर्गया?

प्रश्न 5.
उदाहरणानुसारं लिखत (लिखकर)
यथा- लोकोऽयम्               =               लोकः + अयम्
(क) त्वदुपदेशामृतं           =               त्वत् + उपदेश + अमृतं
(ख) किमधिकं                 =               किम् + अधिकं
(ग) यदेते                         =               यत् + एते।
(घ) चैतेषां                        =               च + एतेषां ।
(ङ) पुनर्गेया                     =               पुनः + गेया

प्रश्न 6.
संस्कृत भाषायाम् अनुवादं कुरुत (अनुवाद करके) –
(क) मेरी यह नम्र प्रार्थना  है।
अनुवाद : विनीत प्रार्थनै केयम्।

(ख)
 देश से गरीबी दूर करें।
अनुवाद : देशात् विपन्नता दूरी कुरुत।

(ग) कल्याण के लिए शिक्षा दें।
अनुवाद : कल्याणार्थे  शिक्षत।

(घ)
 स्वास्थ्य के लिए प्रदूषण दूर करें।
अनुवाद : स्वास्थ्याय प्रदूषणं दूरी कुरुत।।

प्रश्न 7.
उचित कथनानां समक्षम् ‘आम्’ अनुचित कथनानां समक्षं ‘न’ इति लिखत (लिखकर)
(क) दीनेषु दयादृष्टिः देया।
उत्तर : आम्

(ख)
 दीनरक्षायाः प्रतिज्ञा हेया।
उत्तर : न

(ग)
 प्रतिदिनं दन्त धावनं कुर्यात।
उत्तर : आम्

(घ) सुन्दरं लेखं न लिखेत्।
उत्तर : ने

नोट – विद्यार्थी ध्यातव्यम् और शिक्षण-संकेत स्वयं करें।

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